भारतीय सेना के बेड़े में शामिल हुई सातवीं पिनाका रेजिमेंट, रॉकेट आर्टिलरी की शक्ति और बढ़ी

भारतीय सेना के बेड़े में शामिल हुई सातवीं पिनाका रेजिमेंट, रॉकेट आर्टिलरी की शक्ति और बढ़ी


भारतीय सेना ने अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर दुश्मनों को धूल चटाने के लिए अपनी मारक क्षमता में एक और बड़ा इजाफा किया है। भगवान शिव के अजेय धनुष 'पिनाका' के नाम पर बनी स्वदेशी मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) प्रणाली की सातवीं रेजिमेंट अब पूरी तरह से सेना के ऑपरेशन्स का हिस्सा बन चुकी है।

यह कदम भारतीय तोपखाने (Artillery) को आधुनिक और लंबी दूरी की अचूक मारक क्षमता से लैस करने की दिशा में एक बड़ी छलांग है, जो युद्ध के मैदान में पलक झपकते ही दुश्मनों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है।

रेजिमेंट्स का विस्तार: गलवान से लेकर अब तक का सफर​

  • सातवीं और आठवीं रेजिमेंट: रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों के अनुसार, सातवीं पिनाका रेजिमेंट अब सक्रिय रूप से तैनात है और आर्टिलरी फॉर्मेशन में अपनी जगह ले चुकी है। वहीं, आठवीं रेजिमेंट खड़ी की जा चुकी है, जिसे आधे से ज्यादा साजो-सामान मिल चुका है और इसके सैनिक अभी ट्रेनिंग और कन्वर्जन के दौर से गुजर रहे हैं। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक यह भी पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हो जाएगी।
  • तेज हुआ आधुनिकीकरण: 2010 से 2020 के बीच सेना ने शुरुआत में चार पिनाका रेजिमेंट का ऑर्डर दिया था। लेकिन 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद, पहाड़ों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 'रैपिड-रिस्पॉन्स' की अहमियत को समझते हुए रक्षा मंत्रालय ने मारक क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी।
  • भविष्य का लक्ष्य: 2020 में लगभग 2,580 करोड़ रुपये की लागत से छह अतिरिक्त रेजिमेंट का ऑर्डर दिया गया था। अगले साल तक इनमें से दो और रेजिमेंट के चालू होने की उम्मीद है। इसके बाद सेना में पिनाका रेजिमेंट की कुल संख्या 10 हो जाएगी। सेना की लंबी योजना पुरानी रूसी BM-21 'ग्रैड' (Grad) प्रणालियों को पूरी तरह से हटाकर पिनाका की 20 से 22 रेजिमेंट तैयार करने की है।

विनाशकारी मारक क्षमता: 44 सेकंड का 'तांडव'​

सैन्य तकनीक को समझना कई बार जटिल होता है, लेकिन पिनाका का गणित बेहद सीधा और खौफनाक है:
  • रेजिमेंट की संरचना: सेना में एक 'रेजिमेंट' सबसे बुनियादी ऑपरेशनल यूनिट होती है। एक पिनाका रेजिमेंट में 3 बैटरियां होती हैं। हर बैटरी में 6 लॉन्चर होते हैं, यानी एक रेजिमेंट के पास युद्ध के लिए कुल 18 मारक लॉन्चर होते हैं (2 अतिरिक्त लॉन्चर ट्रेनिंग और बैकअप के लिए रखे जाते हैं)।
  • ऑटोमेटेड सिस्टम: यह प्रणाली 'ऑटोमेटेड गन एमिंग एंड पोजिशनिंग सिस्टम' (AGAPS) से लैस है, जो इसे तेजी से निशाना साधने में मदद करती है।
  • पलक झपकते ही तबाही: एक पिनाका बैटरी (6 लॉन्चर) जब एक साथ फायर करती है, तो यह मात्र 44 सेकंड के भीतर 72 रॉकेट दाग सकती है।
  • तबाही का दायरा: यह 72 रॉकेटों की बारिश 1,000 मीटर लंबे और 800 मीटर चौड़े इलाके को पूरी तरह से छलनी कर सकती है। दुश्मन की सेना की टुकड़ियां, उनके गोला-बारूद के डिपो या आर्टिलरी ठिकाने कुछ ही सेकंड में राख में तब्दील हो जाते हैं।

120 किमी की नई रेंज: तकनीक और आत्मनिर्भरता का संगम​

पिनाका सिर्फ एक रॉकेट लॉन्चर नहीं है, बल्कि यह समय के साथ लगातार घातक होता जा रहा है।
  • रेंज में विस्तार: शुरुआती पिनाका (Mk-I) की रेंज 40 किमी थी, जिसे Mk-II में बढ़ाकर 60-75 किमी तक किया गया।
  • लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट (LRGR 120): हालिया ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस और DRDO के अपडेट्स के अनुसार, दिसंबर 2025 में 120 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाले 'लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट' का सफल परीक्षण किया गया है। यह नई तकनीक जीपीएस (GPS) और इनर्शियल नेविगेशन की मदद से लक्ष्य को अचूक सटीकता के साथ भेद सकती है।
  • रणनीतिक अहमियत: पिछले साल हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान दुश्मन की लंबी दूरी की मिसाइलों (जैसे पाकिस्तान की फतह-II) के खतरे को देखते हुए, पिनाका के इस 120 किमी वाले संस्करण ने भारतीय सेना को चीन की अत्याधुनिक 'रॉकेट फोर्स' और सीमा पार के अन्य खतरों का मुंहतोड़ जवाब देने में पूरी तरह सक्षम बना दिया है।
इस अचूक प्रणाली को DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है और टाटा पावर (Tata Power), लार्सन एंड टूब्रो (L&T), और BEML जैसी भारतीय रक्षा कंपनियों द्वारा इसका निर्माण किया जा रहा है। फ्रांस और आर्मेनिया जैसे देश भी अब भारत की इस स्वदेशी ताकत को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
 

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