वैश्विक रक्षा मंच पर 'आत्मनिर्भर भारत' की गूंज अब अफ्रीका महाद्वीप में भी स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही है।
भारतीय रक्षा विनिर्माण के लिए एक और गौरवशाली मील का पत्थर स्थापित करते हुए, भारतीय कंपनी मेटलोनिक्स (Metlonics) की मोरक्कन इकाई ने कैसाब्लांका के पास बेरेचिद (Berrechid) स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) कारखाने में WhAP 8×8 बख्तरबंद वाहनों के लिए 20 नए हल्स (ढांचों) का निर्माण शुरू कर दिया है।
यह कदम भारत और मोरक्को के बीच तेजी से गहरी होती रक्षा विनिर्माण साझेदारी का एक प्रत्यक्ष प्रमाण है, जो पूरी तरह से भारतीय तकनीक पर आधारित स्वदेशी हथियारों के स्थानीयकरण पर केंद्रित है।
बेरेचिद: भारत-मोरक्को रक्षा संबंधों का नया केंद्र
टाटा का बेरेचिद स्थित यह विशाल विनिर्माण संयंत्र (जो कि अफ्रीका में किसी भारतीय निजी कंपनी का पहला सबसे बड़ा रक्षा कारखाना है) अब रॉयल मोरक्कन सशस्त्र बलों (FAR) के लिए एक प्रमुख असेंबली हब बन चुका है।हाल ही में मोरक्को को पहले 5 WhAP 8×8 वाहनों की सफल डिलीवरी की गई थी। अब 20 नए हल्स का निर्माण यह दर्शाता है कि उत्पादन लाइन पूरी तरह से स्थिर हो चुकी है और स्थानीय औद्योगिक भागीदारी के साथ यह प्रोग्राम अपनी पूरी रफ्तार पकड़ रहा है।
मोरक्को ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण के तहत कुल 150 WhAP 8×8 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (ICV) का ऑर्डर दिया है। यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा विदेशी बख्तरबंद वाहन रक्षा निर्यात सौदा है।
WhAP 8×8: आधुनिक युद्धक्षेत्र का 'तैरता हुआ किला'
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स द्वारा संयुक्त रूप से विकसित WhAP (Wheeled Armoured Platform) 8×8 कोई साधारण वाहन नहीं है। आइए इसकी उन्नत तकनीक को सरल भाषा में समझते हैं:- अजेय गतिशीलता (High Mobility): 8x8 का मतलब है कि इस वाहन में 8 पहिए हैं और इंजन की ताकत सभी 8 पहियों में जाती है। 600 हॉर्सपावर (hp) के शक्तिशाली इंजन के साथ, यह वाहन सड़क पर 100 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार पकड़ सकता है और कीचड़, रेत या उबड़-खाबड़ रास्तों पर बिना फंसे आसानी से दौड़ सकता है।
- पानी में तैरने की क्षमता (Amphibious): यह केवल जमीन का शेर नहीं है; इसके पिछले हिस्से में लगे विशेष वॉटर जेट्स इसे नदियों और झीलों को तैरकर पार करने की क्षमता देते हैं, जो इसे एक बेहतरीन 'एम्फीबियस' (जल-थलचर) योद्धा बनाते हैं।
- कड़ी सुरक्षा (Blast & Mine Protection): इसका ढांचा (Hull) इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह सैनिकों को बारूदी सुरंगों (Mine blasts) और भारी गोलीबारी से सुरक्षित रखता है।
- मॉड्यूलर डिजाइन: यह एक "प्लग-एंड-प्ले" सिस्टम की तरह है। इसे जरूरत पड़ने पर सैनिकों को ले जाने (APC), दुश्मन की टोह लेने (Reconnaissance), या कमांड सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने के लिए आसानी से ढाला जा सकता है।
घातक मारक क्षमता: रोबोटिक बुर्ज (UT30MK2 Turret)
मोरक्को के लिए बनाए जा रहे इन वाहनों की सबसे बड़ी खासियत इनकी इजरायली मारक क्षमता है। इन पर एलबिट सिस्टम्स (Elbit Systems) का UT30MK2 अनमैन्ड टरेट (मानवरहित बुर्ज) लगाया जा रहा है।आसान शब्दों में, यह छत पर लगा एक ऐसा रोबोटिक हथियार है जिसे सैनिक वाहन के अंदर सुरक्षित बैठकर वीडियो गेम की तरह रिमोट से कंट्रोल कर सकते हैं। इसमें एक 30mm की ऑटोमैटिक तोप और मशीन गन लगी है।
साथ ही, यह उन्नत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर (जो दिन और रात के घने अंधेरे में भी दुश्मन को साफ देख सकते हैं) और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों (जैसे स्पाइक-एलआर) से लैस है। यह प्रणाली इस भारतीय वाहन को दुश्मन के टैंकों और पैदल सेना के ठिकानों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद करने की अचूक ताकत देती है।
भारत के रक्षा उद्योग की वैश्विक उड़ान
टाटा और DRDO का यह सफल मोरक्को प्रोग्राम केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि यह भारतीय रक्षा विनिर्माण के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है।यह दुनिया को स्पष्ट संदेश देता है कि भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं रहा, बल्कि वह विश्व स्तरीय और युद्ध में परखे गए (combat-proven) उन्नत हथियारों का निर्माता और निर्यातक बन चुका है।
वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की यह बढ़ती धमक हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।