भारतीय सेना को जल्द मिलेगी 'धनुष' तोपों की आखिरी खेप, स्वदेशी आर्टिलरी प्रोग्राम ने पकड़ी रफ्तार

भारतीय सेना को जल्द मिलेगी 'धनुष' तोपों की आखिरी खेप, स्वदेशी आर्टिलरी प्रोग्राम ने पकड़ी रफ्तार


आज हम बात करेंगे भारत की रक्षा तैयारियों और आत्मनिर्भर भारत की एक बहुत बड़ी कामयाबी की। हमारी भारतीय सेना की आर्टिलरी (तोपखाने) की ताकत अब कई गुना बढ़ने वाली है।

इस साल 2026 के अंत तक, सेना को स्वदेशी 'धनुष' (Dhanush Howitzer) तोपों के पहले ऑर्डर की आखिरी खेप मिलने जा रही है। यह मील का पत्थर साबित करता है कि भारत का अपना आर्टिलरी मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम अब पूरी रफ्तार पकड़ चुका है।

'देसी बोफोर्स' का जलवा और आधुनिक तकनीक​

अगर आप सोच रहे हैं कि यह 'धनुष' तोप आखिर है क्या और इतनी खास क्यों है? आसान भाषा में समझें तो इसे हमारा "देसी बोफोर्स" कहा जाता है।

आपको 1999 का कारगिल युद्ध तो याद ही होगा, जब स्वीडन से आई बोफोर्स तोपों ने पहाड़ों पर बैठे दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए थे। धनुष उसी बोफोर्स (FH-77B) का एक नया, 'अपग्रेडेड' और पूरी तरह से हाई-टेक भारतीय अवतार है।

तकनीक के मोर्चे पर यह पुरानी बोफोर्स से कई कदम आगे है:
  • मारक क्षमता (Range): जहां पुरानी बोफोर्स 39-कैलिबर की थी और उसकी रेंज 27 किलोमीटर थी, वहीं हमारी स्वदेशी धनुष 155mm/45-कैलिबर की है। इसकी मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक है! यानी दुश्मन काफी दूर बैठकर भी हमारी पहुंच से बाहर नहीं है।
  • स्मार्ट और अचूक: इसे इतना स्मार्ट बनाया गया है कि यह रात और दिन, दोनों समय अचूक निशाना लगा सकती है। इसमें 'ऑटो-लेइंग' (Auto-laying) और एडवांस नेविगेशन सिस्टम लगा है। इसका सीधा मतलब है कि यह तोप अपनी जगह और टार्गेट को खुद समझकर एकदम सटीक फायर कर सकती है।
  • पूर्ण स्वदेशी: इसे मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (जो अब AWEIL - Advanced Weapons and Equipment India Limited के अंतर्गत आती है) में बनाया जा रहा है। सबसे गर्व की बात यह है कि इसके 81% से ज्यादा पुर्जे पूरी तरह भारत में बने हैं

शुरुआती चुनौतियां और अब की दमदार वापसी​

2019 में सेना ने 114 धनुष तोपों का ऑर्डर दिया था। किसी भी नई स्वदेशी तकनीक की तरह, शुरुआती दिनों में इसके प्रोडक्शन और क्वालिटी कंट्रोल में कुछ रुकावटें आईं, जिससे डिलीवरी थोड़ी धीमी रही। लेकिन हमारी डिफेंस इंडस्ट्री ने हार नहीं मानी। सारी कमियां दूर कर ली गई हैं, और अब उत्पादन की क्वालिटी एकदम बेहतरीन और स्थिर है।

इसी का नतीजा है कि 2026 के अंत तक इस ऑर्डर की बची हुई लगभग 30 तोपें सेना को सौंप दी जाएंगी। वर्तमान में सेना की 4 आर्टिलरी रेजीमेंट इन तोपों से लैस होकर हमारी सीमाओं पर गरज रही हैं, और इस साल 2 नई रेजीमेंट भी पूरी तरह तैयार हो जाएंगी।

भविष्य की तैयारी: 300 नई तोपों का प्लान​

कहानी सिर्फ 114 तोपों पर खत्म नहीं होती है। 80 के दशक में भारत ने लगभग 400 बोफोर्स तोपें खरीदी थीं, जिनमें से अब आधी से भी कम सर्विस में बची हैं। पुरानी पड़ चुकी इन बोफोर्स तोपों को धीरे-धीरे रिटायर किया जा रहा है।

इनकी जगह लेने के लिए सेना की प्लानिंग बहुत बड़ी है। रक्षा मंत्रालय जल्द ही 300 अतिरिक्त धनुष तोपों के एक नए ऑर्डर को मंजूरी देने जा रहा है। इस विशाल ऑर्डर से सेना करीब 15 नई रेजीमेंट खड़ी करेगी।

यह तोपें इस तरह डिज़ाइन की गई हैं कि ये राजस्थान के तपते रेगिस्तान से लेकर हिमालय और लद्दाख की जमा देने वाली ऊंचाइयों तक, हर मोर्चे पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे सकती हैं।

धनुष तोपों का यह सफर इस बात का पक्का सबूत है कि भारत अब युद्ध के मैदान में विदेशी तकनीक का मोहताज नहीं है। हमारी सीमाएं अब हमारे अपने 'धनुष' से सुरक्षित हैं।
 

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