आधुनिक हवाई युद्ध के इस बदलते दौर में, जहाँ 'स्टेल्थ' (रडार की पकड़ में न आने वाली तकनीक) ही आसमान की असली सिकंदर है, भारत का 'घातक' (Ghatak UCAV) भारतीय वायुसेना के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
DRDO द्वारा तैयार किया जा रहा यह मानवरहित लड़ाकू विमान (ड्रोन) दुश्मनों के लिए एक कड़ा संदेश है। चीन जहाँ अपने 5वीं पीढ़ी के J-20 फाइटर जेट्स तैनात कर रहा है और 6वीं पीढ़ी के हथियारों (जैसे लॉयल विंगमैन ड्रोन) पर काम कर रहा है, वहीं भारत को सीमाओं पर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए ऐसे ही अचूक हथियारों की जरूरत है।
'घातक' वो स्वदेशी ब्रह्मास्त्र है जो बिना किसी पायलट की जान जोखिम में डाले, दुश्मन के गढ़ में तबाही मचाने का दम रखता है।
रडार की नज़रों से ओझल: फ्लाइंग-विंग डिज़ाइन
घातक का 'फ्लाइंग-विंग' डिज़ाइन इसे सचमुच में अदृश्य बनाता है। आसान भाषा में समझें तो, इसमें आम विमानों की तरह कोई पूंछ (tail) या धड़ (fuselage) नहीं होता।- अदृश्य ढांचा: इसका घुमावदार आकार, अंदर की तरफ मुड़े हुए एयर इनटेक और हथियारों को शरीर के अंदर छिपाकर रखने की क्षमता (Internal weapon bay) इसके रडार क्रॉस-सेक्शन को न के बराबर कर देते हैं।
- आधुनिक मटीरियल: हालिया ओपन-सोर्स अपडेट्स (2026) के मुताबिक, DRDO इसके बाहरी ढांचे को बनाने में 80 से 90 प्रतिशत 'कार्बन-फाइबर कंपोज़िट' (Carbon-fibre Prepreg) का इस्तेमाल कर रहा है, जो इसके स्टेल्थ को बिल्कुल नेक्स्ट-लेवल पर ले जाता है।
इसे सुखोई-30MKI, तेजस या भविष्य के AMCA के साथ एक वफादार साथी (MUM-T) की तरह टीम बनाकर ऑपरेट किया जा सकेगा।
तेजस के बराबर आकार, लेकिन क्षमता कहीं ज़्यादा
आकार में यह HAL तेजस के ही बराबर है, लेकिन इसके काम करने की क्षमताएँ हैरान करने वाली हैं:- लंबी उड़ान: इसका अधिकतम टेकऑफ़ वजन करीब 13 टन है। यह 3.7 टन ईंधन अपने अंदर रख सकता है (तेजस Mk1A के 2.5 टन के मुकाबले काफी ज़्यादा), जिसका सीधा मतलब है 1,000 किलोमीटर से ज्यादा का कॉम्बैट रेडियस।
- सहनशीलता (Endurance): यह 5 से 8 घंटे तक हवा में लगातार टिक सकता है। इस लंबी रेंज की बदौलत यह उन इलाकों तक पहुँच सकता है जहाँ आम फाइटर जेट्स बिना हवा में ईंधन भरे नहीं जा सकते।
हथियारों का जखीरा और 'गांडीव' की मार
स्टेल्थ होने के बावजूद 'घातक' 1.5 टन तक के हथियारों को अपने अंदर छिपाकर ले जा सकता है।इसमें हवा-से-जमीन पर मार करने वाले हथियारों के अलावा, सबसे अहम है लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इंटीग्रेशन।
- अस्त्र Mk3 का वार: सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक से लैस 350 किमी की अनुमानित रेंज वाली 'अस्त्र Mk3' (गांडीव) मिसाइल जब घातक के जरिए ऊंचाई से दागी जाएगी, तो यह दुश्मन के अवाक्स (AEW&C) और स्टेल्थ फाइटर्स को उनके संभलने से पहले ही ढेर कर देगी।
F-35 जैसे सेंसर्स और AI का दिमाग
घातक की सबसे बड़ी खूबी इसके आधुनिक सेंसर्स हैं, जैसे 'डिस्ट्रिब्यूटेड अपर्चर सिस्टम' (DAS)।यह तकनीक बिल्कुल अमेरिका के F-35 फाइटर जेट जैसी है। यह बिना रडार तरंगे छोड़े (ताकि दुश्मन को भनक न लगे) विमान को 360-डिग्री देखने की ताकत देती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस यह UCAV खुद से लक्ष्य पहचानने, हवा में जटिल युद्धाभ्यास करने और टक्कर से बचने के फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम है।
2026 का ताज़ा अपडेट और आगे की राह
हालिया ओपन-सोर्स रिपोर्ट्स (मार्च 2026) के अनुसार, इस प्रोग्राम ने काफी रफ़्तार पकड़ ली है:- 60 यूनिट्स को हरी झंडी: Ministry of Defence के 'Defence Procurement Board' (DPB) ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 60 घातक UCAV की खरीद के प्रस्ताव को अपनी संस्तुति दे दी है।
- स्वदेशी 'ड्राई कावेरी' इंजन: इसे भारत में ही विकसित किए जा रहे 49 kN थ्रस्ट वाले ड्राई कावेरी (Dry Kaveri) इंजन से ताकत मिलेगी। सरकार ने 2026 तक इस इंजन के फाइनल सर्टिफिकेशन का सख्त लक्ष्य रखा है।